Rekha 13 में शादी, 29 में विधवा और फिर ऐसे बनी Business Woman | Rekha

Rekha Intro :-हर इंसान की जिंदगी में कुछ ऐसे दुख भरे पन्ने होते हैं जिन्हें पढ़कर आपकी रूह काँप जाती है और जीना तो इसे हजार गुना मुश्किल भरा होता है हम आज ऐसी एक महान महिला रेखा के बारे में बात करने वाले जिनकी शादी महज 13 साल की उम्र में कर दी गई थी और 18 साल में तीन बच्चों के मां के साथ-साथ विधवा भी बन गई लोगों और घर वालों के तानों से परेशान आकर इन्हें अपना घर तक छोड़ना पड़ा इन सारी परेशानियां और अपने हालातो से लड़कर इन्होंने अपनी एक अलग पहचान बनाई और एक Business Woman बनी तो आईए जानते हैं इसकी कहानी को विस्तार से यह कहानी सिर्फ रेखा की नहीं है हर उस औरत औरत की है जिन्होने समाज के बंदिशें और आर्थिक तंगी और परेशानियों से लड़कर एक नया रास्ता बनाया है यह कहानी आपके अंदर की आत्मा को जगा देगी

Rekha Full Story And Biography

Rekha Early life

Rekha का जन्म मध्य प्रदेश के एक छोटे से गांव में हुआ था उनके परिवार के सभी लोग एक साथ रहते थे जिसमें दादा-दादी बड़े पिताजी पिताजी के तीन भाई शामिल थे बचपन में यह कभी सोच नहीं पाई कि उनके जीवन में कभी इतना बड़ा कठिन मोर आएगा जब यह 13 साल की थी आठवीं क्लास में पढ़ती थी तब उनके घर वालों ने इनका शादी तय कर दिया जहां बाकी बच्चे इस उम्र में गुड्डे गुड़िया की शादी वाली खेल खेला करते थे उस उम्र में इनकी शादी कर दी गई उस समय उनकी घर के आर्थिक हालात काफी खराब थी इनकी पिताजी की कमाई लगभग ना के बराबर थी पूरे परिवार का जिम्मा इनके बड़े पिताजी के ऊपर थी तो उनके परिवार में उनके सारे फैसले इनके बड़े पिताजी ही लिया करते थे इनके पिताजी की कमाई ना होने के कारण इनके बड़े पिताजी ने इनका शादी करने का फैसला कर दिया ताकि ऊपर से एक बोझ कम हो जाए उनके घर में इनकी कजिन सिस्टर जो इसे बड़ी थी उनकी शादी नहीं की गई क्योंकि उनके पिताजी कमाई करते थे और अपने बच्चों की उज्जवल भविष्य चाहते थे

Rekha Marrige

इनकी शादी एक ऐसे व्यक्ति से तय कर दी गई जिनकी पहले भी शादी हो चुकी थी और उनकी पहली पत्नी ने आत्महत्या करके अपनी जान गवा दी थी जब रेखा को यह बात पता चली तो उन्होंने अपने घर वालों से काफी मिन्नतें की और मनाने की कोशिश की लेकिन उनके घर वालों ने उनकी ना सुनी और जबरदस्ती इनकी शादी कर दी 13 साल की उम्र में एक बहू बन गई जहां उनका ना कोई था बस जिम्मेदारी और उम्मीदें थी

शादी के 1 साल बाद ही रेखा मां बन गई इसी बीच इनकी छोटे देवर की शादी इनकी मौसी की लड़की से करवा दी गई थी लेकिन कुछ घरेलू परेशानियों के कारण उनके देवर ने आत्महत्या कर ली और उनके मौसी के परिवार वालों ने सारा कसूरवार उनके पति को ठहराया बिना किसी जांच पड़ताल और पूछताछ के पुलिस में शिकायत दर्ज कर दी और रेखा के पति को जेल भेज दिया गया उसे समय रेखा की पहली बेटी मात्र 15 दिन की थी उनके पति के जेल जाने के बाद उनके ससुराल वाले ने उनके बच्चे और इन्हें अकेला छोड़ दिया खाना खाकर अपने-अपने कमरे में चले जाते यह घर का सारा काम करती और इन्हें सिर्फ खाने को मिलता किचन में बची हुई चीज हालांकि उनके ससुर जी के सरकारी नौकरी से पेंशन आती थी

इनका हाल-चाल पूछने वाला कोई नहीं था यह अकेले ही किचन में काम करती और कभी रोती और सिर्फ इस इन्हें अकेलापन महसूस होता इसी बीच इन्होंने अपने दूसरे बच्चे का जन्म दिया किचन में खड़े-खड़े देखने के लिए या पूछने के लिए उनके घर वालों में से कोई भी नहीं आया सिर्फ गांव से एक दाई को बुलाया और उन्होंने इनका सब सफाई करवाया और सिर्फ मात्र दो-तीन दिन के लिए इन्हें कम से आराम मिला और फिर उसके बाद यह अपने किचन के काम में लगी रही नहीं तो इन्हें खाना तक नसीब नहीं होता इन सब के कारण यह घर का काम करती और घर का ताना सुनती और कुछ भी नहीं बोलती

कुछ दिनों बाद उनके पति जेल से आए और पहले जहां काम करते थे वहां काम पर लग गए जब इनकी शादी हुई थी तब इनकी पति की मात्र कमाई थी ₹3000 महीना फिर यह उसी दुकान में काम करने लगे फिर इसके पति के दिमाग में आइडिया आया कि यह सब काम करने से नहीं चलने वाला है कुछ बिजनेस करके देखते हैं फिर इसके पति ने वेल्डिंग का दुकान करने का सोचा लेकिन दुकान के लिए पैसे आएंगे कहां से उनके परिवार से कोई भी मदद करने वाला नहीं था उनके पति ने पहले कुछ पैसे बचाकर मात्र 15000 में एक प्लॉट लिया था फिर उस प्लॉट को बेचकर दुकान करने का सोचा उसे प्लॉट को करीब डेढ़ लाख रुपए में बेचकर इन्होंने अपने दुकान की शुरुआत की और धीरे-धीरे इनका काम चलने लगा और कुछ सामान्य उधारी पर भी लिए थे इसी बीच लॉकडाउन का समय आ गया और काम पूरा बंद हो गया जो भी पैसे तो वह भी खत्म हो गए और सिर्फ टेंशन भरने लगी घर वाले भी उनके पति को ताना देने लगे

Rekha की पति की आत्महत्या

इसी बीच उनकी बेटी का जन्मदिन आ गया इसके पति ने अपने बेटी का जन्मदिन धूमधाम से मनाया अपने पूरे परिवार को बुलाया और लॉकडाउन का समय था सबको छोड़ने के लिए एक गाड़ी का इंतजाम किया की सबको एक-एक करके उनके घर पर छोड़ देंगे इसी बीच रेखा ने अपने मायका जाने का इच्छा जाहिर की की दो दिन वहां रह कर आएंगे तो अच्छा लगेगा फिर उनके पति ने सबको एक-एक करके छोड़ दिया जब अपना मायके पहुंची तो इन्हे खबर मिला कि उनके पति ने आत्महत्या कर ली है यह दौडी दौडी भाग वहां से आई उसे समय भी लोग इन्हें ताना दे रहे थे यह चुपचाप सुनती रही और रोती रही

उनके पति के जाने के बाद उनके पति के ऊपर करीब 7 से 8 लख रुपए का कर्जा हो गया था जो अलग-अलग दुकानों से इन्होंने सामान उठाए थे अब कर्जदार इन्हें परेशान करने लगे पैसे के लिए, और उनके घर में भी इनके साथ काफी दुर्व्यवहार होने लगा इनके देवर शराब पीकर आते और इन्हें पूरी रात गाली बकते एक दिन तो ऐसा हुआ पूरी रात उनके गेट के सामने में गाली बकी और उनके दरवाजे के सामने में काफी तोर फोर किया तब इन्होंने तय किया कि अब यह घर छोड़ना ही सही रहेगा अपने कुछ सामान लेकर मात्र ₹3000 लेकर अपने बच्चों के साथ इन्होंने घर छोड़ दिया और करीब ₹1500 में एक छोटा सा किराए का कमरा लिया और वहां रहने लगी

Rekha की दुकान बचाने का फैसला

पति के कर्ज को चुकाने के लिए इन्होंने अपने पति के दुकान सारे सामान को बेच दिया इससे इनका कर्ज तो चूक गया लेकिन अब इनके पास खाने पीने के लिए कुछ भी नहीं बचा और नहीं यह कोई काम करती थी इन्हें काफी बुरा लगा कि उनके पति ने जो मेहनत से खरा किया आज उनका नाम खत्म हो रहा है फिर इनको कुछ स्टाफ थे जिन्होंने इनका काफी साथ दिया इन्हें काम के बारे में समझाया और फिर उन्होंने उसे दुकान को फिर से चलने का निर्णय लिया बैंक से करीब 8 Lakh लोन लेकर दुकान को फिर से चालू किया लोगों ने काफी आलोचना की की एक औरत कैसे दुकान को चलाएगी लेकिन रेखा हार नहीं मानी उस बाजार में करीब 100 पुरुष दुकानदार के बीच एक अकेली महिला दुकानदार थी लोगों ने काफी बुरा भला भी कहा शुरुआत में ग्राहक कम आते थे लेकिन यह फिर भी दुकान में लगन और मेहनत के साथ काम करती कभी-कभी तो ऐसा गया कि यह एक दिन में एक बार ही खाना पकाती और पूरे दिन खाती और साथ ही साथ उस समय उनकी छोटी बहन ने भी इनका काफी मदद किया उनके बच्चों का ख्याल रखा और अपने घर से खाना बनाकर उनके बच्चों को लाकर देती थी जो कुछ पहले के ग्राहक थे वह भी दुकान में उतने नहीं आते थे की एक महिला को देखकर उसे दुकान में ज्यादा जाता है लोग बातें ना बनाने लग जाए

Rekha की बदलाव की शुरुआत

शुरुआत के दो साल काम धीरे धीरे चलता रहा फिर एक दिन क़िस्मत ने मौक़ा दिया और उनके पति के पुराने दोस्त के स्कूल में निर्माण का कार्य का बड़ा ऑर्डर दिया रेखा ने बहुत ही बेहतरीन और अच्छी क्वालिटी के साथ समय से पहले काम को कम्पलीट किया अब इसकी काम की क्वालिटी को देखते हुए एक स्कूल फिर तीन स्कूलों का काम मिला और फिर धीरे धीरे यह सिलसिला और आगे चल पड़ा और इन्हें काम पे काम मिलते गए और इनका काम चल पड़ा जो लोग कहते थे कि औरत क्या कर पाएगी आज वही लोग तारीफ़ करते हैं आज के टाइम पे रेखा का बिज़नस काफ़ी अच्छा चल रहा है इनका सारा कर्ज़ भी चूक गया है जो उन्होंने लोन भी लिया था और साथ ही साथ अपने बच्चों को भी अच्छे से पढ़ा लिखा रही है एक अच्छे स्कूल में और साथ ही साथ इनके घर काफ़ी अच्छे से चल रहा है और साथ ही साथ ही अपने सारे स्टाफ़ को सैलरी देने के बाद क़रीब 2-3 लाख रुपया महीने का टर्नओवर करती है अपने दुकान से | रेखा का मानना है कि इंसान कभी भी कमज़ोर नहीं होता वक़्त और हालात कमज़ोर होते हैं और औरत तो बिलकुल भी कमज़ोर नहीं होती है

सीख और संदेश

ये थी रेखा की एक प्रेरणादायक कहानी जिससे हमें बहुत कुछ सीखने को मिलता है कि अगर कोई इंसान या औरत ठान ले तो कुछ भी कर सकती है न तो इसलिए अब अपने हालात और समय को कभी ब्लेम मत कीजिए मेहनत कीजिए मेहनत करने से सफलता ज़रूर मिलती है

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  • bablu

    मैं बबलू , 24 वर्षीय, भारतीय जनसंचार संस्थान से जनसंचार और पत्रकारिता में स्नातक हूँ। मुझे सफल और कामयाब लोगों के बारे मैं लिखना पसन्द है। kamyabstory.in पर, जो अपनी जिंदगी मैं सफल या कामयाब हो चुके है उनके बारे मैं लिखता हूँ। अपनी रुचि और विशेषज्ञता के साथ पाठकों के लिए नवीनतम जानकारी लाता हूँ।

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