Maulana Abul Kalam Azad Biography : देश के पहले शिक्षा मंत्री और स्वतंत्रता सेनानी की संघर्ष की कहानी

By bablu

Maulana Abul Kalam Azad

Join Telegram

Join Now

Maulana Abul Kalam Azad भारतीय आज़ादी के बड़े नेता, सच्चे देशभक्त, लेखक और आज़ाद भारत के पहले Education Minister थे। उनका जीवन मेहनत, बलिदान और देशप्रेम की कहानी है। 11 November 1888 को Mecca में जन्मे इस महान इंसान ने न सिर्फ आज़ादी के लिए काम किया बल्कि देश की Education System को भी बेहतर बनाया। Azad एक ऐसे नेता थे जिन्होंने हमेशा Hindu-Muslim Unity की बात की और देश के Partition का विरोध किया। उन्होंने Mahatma Gandhi के Non-Violence के रास्ते को अपनाया और Khilafat Movement से लेकर Quit India Movement तक हर लड़ाई में हिस्सा लिया। सिर्फ 23 साल की उम्र में वे Congress के सबसे युवा President बने। आज़ादी के बाद उन्होंने IIT, UGC जैसे बड़े Education Institutions की शुरुआत की। उनका ज्ञान, मेहनत और सोच आज भी हम सब के लिए प्रेरणा है। 22 February 1958 को उनके निधन के बाद, 1992 में उन्हें Bharat Ratna से सम्मानित किया गया।

Maulana Abul Kalam Azad wiki/bio

CategoryDetails
Full NameAbul Kalam Ghulam Muhiyuddin Ahmed
Also Known AsMaulana Azad
Date of Birth11 November 1888
Place of BirthMakkah, Saudi Arabia
Date of Death22 February 1958
Place of DeathNew Delhi, India
NationalityIndian
OccupationFreedom Fighter, Scholar, Journalist, Politician, Educationist
Known ForFreedom Struggle, First Education Minister of India, Hindu-Muslim Unity
Political PartyIndian National Congress
Key PositionsCongress President, Leader of Khilafat Movement, Education Minister (1947–1958)
EducationHome-schooled (Arabic, Urdu, Persian, Bengali, English), Al-Azhar University, Cairo
Famous WorksIndia Wins Freedom, Ghubar-e-Khatir, Tarjuman-ul-Quran, Tazkirah
Major AchievementsFounder of IITs, UGC, Central Institute of Education, ICCR, Sangeet Natak Akademi, Sahitya Akademi, Lalit Kala Akademi, Adult Education Board
Awards & HonorsBharat Ratna (1992, posthumous), National Education Day (11 November)
FamilyFather: Muhammad Khairuddin, Mother: Sheikha Alia, Spouse: Zuleikha Begum, Sister: Fatima Begum
Burial PlaceJama Masjid, Urdu Bazaar, Delhi

Maulana Abul Kalam Azad Early life and family

Maulana Abul Kalam Azad का असली नाम Abul Kalam Ghulam Muhiyuddin Ahmed था। उनका जन्म 11 November 1888 को Mecca, Saudi Arabia में हुआ था। उनके पिता Maulana Muhammad Khairuddin एक जाने-माने Islamic Scholar थे। वे Bengal के Muslim परिवार से थे और उनकी जड़ें Afghanistan से जुड़ी थीं। उन्होंने कई Books लिखीं और बहुत से लोगों को Islam की शिक्षा दी। उनकी माँ Sheikha Alia भी एक Scholar परिवार से थीं और Medina के एक बड़े विद्वान की बेटी थीं।

1857 के विद्रोह के बाद Azad के पिता Delhi छोड़कर Mecca चले गए थे, और वहीं उनका विवाह हुआ। साल 1890 में, जब Maulana Abul Kalam Azad सिर्फ दो साल के थे, उनका परिवार Calcutta (अब Kolkata) में रहने आ गया। उनके पिता बहुत Religious थे और उन्होंने Azad की परवरिश भी उसी तरीके से की।

सिर्फ 13 साल की उम्र में Azad की शादी Zuleikha Begum से कर दी गई, जो Aftabuddin Ahmed की बेटी थीं। उनकी बहन Fatima Begum के अनुसार, शादी के समय Azad रो रहे थे और पूछ रहे थे कि उन्हें औरतों के कमरे में क्यों ले जाया जा रहा है। Zuleikha Begum भी Urdu और Persian जानती थीं और उन्हें Arabic की भी थोड़ी समझ थी।

Education and early interests

Maulana Abul Kalam Azad की पढ़ाई पूरी तरह घर पर हुई। उन्हें कभी स्कूल या मदरसे नहीं भेजा गया। उनके पिता और घर के टीचरों ने ही उन्हें पढ़ाया। उन्होंने सबसे पहले Arabic सीखी, जो उनकी पहली भाषा बनी। इसके बाद उन्होंने Urdu, Persian, Bengali और English भी सीख ली।

Maulana Abul Kalam Azad को धर्म, गणित, इतिहास, विज्ञान और सोचने-समझने की पढ़ाई कराई गई। वे बहुत तेज दिमाग के थे। 12 साल की उम्र से पहले ही उन्होंने एक Library, Reading Room और Debate Group बना लिया था। 12 साल की उम्र में उन्होंने Al-Ghazali नाम के विद्वान पर लिखना चाहा। 14 साल की उम्र में वे ‘Makhzan’ नाम की मैगज़ीन में लिखने लगे। 15 साल की उम्र में वे अपने से बड़ी उम्र के लोगों को पढ़ाने लगे।

सबसे खास बात यह थी कि Azad ने अपनी पढ़ाई 16 साल की उम्र में खत्म कर ली, जबकि दूसरों को वही काम करने में 25 साल लगते थे। 1900 में वे ‘Al-Misbah’ नाम की साप्ताहिक मैगज़ीन के एडिटर बने और 1903 में ‘Lisan-us-Sidq’ नाम की मासिक मैगज़ीन शुरू की।

अपने पिता की इच्छा के खिलाफMaulana Abul Kalam Azad ने English भी सीखी। 1905 में उनके पिता ने उन्हें Cairo की Al-Azhar University में पढ़ने के लिए Egypt भेजा, जो मुस्लिम दुनिया की मशहूर यूनिवर्सिटी थी। 1907 में वे भारत लौट आए और Indian National Movement में दिलचस्पी लेने लगे।

Maulana Abul Kalam Azad Journalism and political career

Maulana Abul Kalam Azad ने 11 साल की उम्र से ही “Azad” (स्वतंत्र) नाम से कविताएँ और लेख लिखने शुरू कर दिए थे। 1908 में उन्होंने Afghanistan, Iraq, Egypt, Syria, Turkey और France की यात्रा की। इन यात्राओं में वे कई आज़ादी के सेनानियों से मिले और Egypt के नेता Mustafa Kamil Pasha से बहुत प्रभावित हुए।

13 July 1912 को Azad ने Calcutta से ‘Al-Hilal’ (The Crescent) नाम का साप्ताहिक Urdu अख़बार शुरू किया। यह 24 पन्नों का अखबार British राज की आलोचना करता था और Indian Muslims को आजादी की लड़ाई में शामिल होने के लिए प्रेरित करता था। Azad इसमें अक्सर Quran की बातें लिखते थे, जिससे लोगों में जोश आता था। यह अखबार इतना मशहूर हुआ कि British सरकार ने 1914 में इसे बंद कर दिया।

इसके बाद Maulana Abul Kalam Azad ने ‘Al-Balagh’ नाम की एक और पत्रिका शुरू की, पर 1916 में उसे भी बंद कर दिया गया। उनकी लिखावट की वजह से उन्हें कई जगहों पर जाने से रोका गया और 1916 से 1920 तक उन्हें Ranchi, Bihar में नजरबंद रखा गया।

1906 में Azad Indian National Congress में शामिल हुए। 1909 में पिता की मौत के बाद उन्होंने Dictionary से English सीखी। उस समय वे क्रांतिकारियों के करीब थे और पुलिस उनका पीछा करती थी।

1920 में Azad Khilafat Movement के नेता बने और Mahatma Gandhi से मिले। First World War के समय उन्होंने British से असहयोग का तरीका अपनाया, जिससे Gandhi बहुत प्रभावित हुए। Azad ने Gandhi के अहिंसक Civil Disobedience Movement को अपनाया और 1919 के Rowlatt Act के खिलाफ आंदोलन खड़ा करने में मदद की।

October 1920 में Maulana Abul Kalam Azad को Aligarh में Jamia Millia Islamia University की समिति का सदस्य चुना गया। 1923 में 35 साल की उम्र में वे Delhi में Congress Session के अध्यक्ष बने। वे Congress के सबसे युवा अध्यक्ष थे और All India Khilafat Committee के अध्यक्ष भी चुने गए।

आजादी की लड़ाई में भूमिका

Maulana Abul Kalam Azadने 1930 में Gandhi के Dandi March में भाग लिया। 1920 से 1945 तक वे कई बार जेल गए। वे Gandhi, Nehru, Subhas Chandra Bose और C.R. Das जैसे नेताओं के करीबी थे।

1940 में Ramgarh Session में Azad फिर से Congress अध्यक्ष बने। उन्होंने Muhammad Ali Jinnah और Muslim League के Two-Nation Theory का विरोध किया। वे Hindu-Muslim Unity के बड़े समर्थक थे और मुसलमानों को हिंदुओं के साथ रहने के लिए कहते थे।

August 1942 में Bombay में Congress का सत्र हुआ जिसकी अध्यक्षता Azad ने की। इस सत्र में ‘Quit India’ प्रस्ताव पास हुआ और Gandhi ने “Do or Die” कहा। Azad इस आंदोलन में सबसे आगे थे।

British सरकार ने आंदोलन शुरू होने से पहले ही Gandhi और बाकी नेताओं को पकड़ लिया। Azad भी गिरफ्तार हुए, तब वे अमेरिकी President Roosevelt के लिए एक पत्र लिख रहे थे, पर वह पूरा नहीं हो सका। Azad को 1942 से 1946 तक Ahmednagar Fort में रखा गया।

जेल में रहते हुए Azad ने अपने दोस्त Nawab Habibur Rahman Khan Sherwani को 24 पत्र लिखे, जो बाद में ‘Ghubar-e-Khatir’ (यादों की धूल) नाम से छपे। इन पत्रों में उन्होंने ईश्वर, धर्म, संगीत और जीवन जैसे विषयों पर लिखा। उनकी एक और किताब ‘Tarjuman-ul-Quran’ है, जो Quran का सरल अनुवाद है।

1946 में रिहा होने के बाद Azad ने Cabinet Mission Plan में अहम भूमिका निभाई। वे India के Partition के खिलाफ थे, पर अंत में मानना पड़ा। 1957 में उन्होंने अपनी किताब ‘India Wins Freedom’ छापी, जिसमें आजादी और बंटवारे की सच्ची कहानी है। इसके कुछ हिस्से उन्होंने 30 साल के लिए छिपा दिए थे ताकि किसी की भावना आहत न हो।

Maulana Abul Kalam Azad Contribution as Education Minister

स्वतंत्रता के बाद Maulana Abul Kalam Azad ने Pandit Jawaharlal Nehru की सरकार में भारत के पहले Education Minister के रूप में 1947 से 1958 तक काम किया। उन्होंने भारत की पढ़ाई व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए बहुत मेहनत की।

आज़ाद का मानना था कि शिक्षा ही देश की मजबूती है। 16 जनवरी 1948 को एक मीटिंग में उन्होंने कहा था, “हमें याद रखना चाहिए कि पढ़ाई हर इंसान का हक है, और इसके बिना वह अपने कर्तव्यों को पूरा नहीं कर सकता।”

उन्होंने 14 साल तक के बच्चों के लिए मुफ्त और जरूरी पढ़ाई की मांग की। आज़ाद चाहते थे कि शिक्षा सिर्फ राज्यों तक न रहे, बल्कि Central Government भी इसमें शामिल हो। इसी कारण शिक्षा को संविधान में रखा गया ताकि Center और State दोनों कानून बना सकें।

आज़ाद की मुख्य उपलब्धियां:

Higher Education:

  • 1951 में पहला IIT Kharagpur खोला गया।
  • इसके बाद IIT Mumbai, Chennai, Kanpur और Delhi बने।
  • 1953 में UGC (University Grants Commission) बनाई गई, जो कॉलेजों को पैसा देती है और पढ़ाई का स्तर देखती है।

अन्य शिक्षा संस्थान:

  • 1947 में Central Institute of Education दिल्ली में खोला, जो अब Delhi University का हिस्सा है।
  • 1955 में School of Planning and Architecture दिल्ली में शुरू किया।
  • Indian Institute of Science (IISc) Bengaluru को भी मजबूत किया।

Sanskriti और Kala:

  • 1950 में ICCR (Indian Council for Cultural Relations) की शुरुआत हुई।
  • 1953 में Sangeet Natak Akademi,
  • 1954 में Sahitya Akademi और Lalit Kala Akademi बनाई गईं।
  • आज़ाद चाहते थे कि पढ़ाई में भारतीय संस्कृति की जगह हो।

Adult Education:

  • वयस्कों को पढ़ाने के लिए Board for Adult Education बनाई गई।

1934 में उन्होंने Jamia Millia Islamia को अलीगढ़ से दिल्ली लाने में मदद की।
1952 में वे लोकसभा के लिए चुने गए और दिल्ली में UNESCO General Conference के अध्यक्ष बने।

मृत्यु और सम्मान

22 फरवरी 1958 को Maulana Abul Kalam Azad का दिल्ली में स्ट्रोक से निधन हो गया। उस समय लोग उनके 70वें जन्मदिन के लिए एक खास किताब छापने की सोच रहे थे। Mahatma Gandhi और Jawaharlal Nehru का अंतिम संस्कार यमुना के पास हुआ था, लेकिन आज़ाद को Jama Masjid के पास उर्दू बाजार में दफनाया गया। वे अंत तक अकेले रहे।

उनके काम और योगदान के लिए 1992 में उन्हें मरणोपरांत Bharat Ratna मिला। लेकिन जीवन में उन्होंने यह सम्मान लेने से मना कर दिया था। उनका कहना था कि जो लोग सम्मान देने वाले हों, उन्हें खुद इसे नहीं लेना चाहिए।

11 नवंबर को हर साल उनकी याद में National Education Day मनाया जाता है। उनके नाम पर कई बड़े संस्थान हैं, जैसे:

  • Jamia Millia Islamia, Delhi
  • Maulana Azad Medical College, Delhi
  • Maulana Azad National Institute of Technology, Bhopal
  • Maulana Azad National Urdu University, Hyderabad
  • Maulana Azad College of Technology, Kolkata
  • Maulana Azad Library, Aligarh Muslim University

लेखन और किताबें

आज़ाद एक अच्छे लेखक और शायर भी थे। उनकी कुछ मशहूर किताबें हैं:

  • India Wins Freedom (1957): भारत की आज़ादी और बंटवारे पर लिखी गई किताब
  • Ghubar-e-Khatir: जेल में लिखे गए 24 पत्रों का संग्रह
  • Tarjuman-ul-Quran: क़ुरान का आसान उर्दू अनुवाद और अर्थ
  • Tazkirah: धर्म और जीवन पर आधारित एक और रचना

उनकी भाषा बहुत सुंदर और दिल छू लेने वाली होती थी। “गुबार-ए-खातिर” में उन्होंने सुबह की चाय बनाने की आदत का प्यारा ज़िक्र किया है।

विरासत

Maulana Abul Kalam Azad का जीवन देशभक्ति, हिम्मत और दूर की सोच का उदाहरण है। उन्होंने न सिर्फ आज़ादी के लिए लड़ाई लड़ी, बल्कि आज़ाद भारत की नई शिक्षा व्यवस्था भी बनाई। वे हमेशा Hindu-Muslim Unity के समर्थक थे और धर्म के आधार पर देश को बाँटने के खिलाफ थे।

Gandhi ji ने उन्हें “सम्राट ऑफ लर्निंग” कहा था। Rabindranath Tagore ने Jamia Millia Islamia को “भारत का सबसे आगे बढ़ने वाला शिक्षा संस्थान” कहा था, जिसे बनाने में आज़ाद की अहम भूमिका थी।

11 नवंबर 1888 को Makkah में जन्मे और 22 फरवरी 1958 को दिल्ली में दुनिया से चले गए मौलाना आज़ाद की कहानी हम सबके लिए प्रेरणा है। उनका जीवन बताता है कि सच्चा मेहनती और ईमानदार इंसान देश के इतिहास में हमेशा जिंदा रहता है।

Disclaimer: यह आर्टिकल सामान्य जानकारी और सार्वजनिक स्रोतों पर आधारित है। किसी भी तथ्यात्मक गलती के लिए लेखक या प्रकाशक जिम्मेदार नहीं होंगे।

इसे भी देखें:-

Bhagat Singh Biography:23 की उम्र में कुर्बान होने वाले महान क्रांतिकारी

Mahatma Gandhi Biography

Author

  • bablu

    मैं बबलू , 24 वर्षीय, भारतीय जनसंचार संस्थान से जनसंचार और पत्रकारिता में स्नातक हूँ। मुझे सफल और कामयाब लोगों के बारे मैं लिखना पसन्द है। kamyabstory.in पर, जो अपनी जिंदगी मैं सफल या कामयाब हो चुके है उनके बारे मैं लिखता हूँ। अपनी रुचि और विशेषज्ञता के साथ पाठकों के लिए नवीनतम जानकारी लाता हूँ।

    View all posts